पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स

शिल्प उद्यमिता में डिप्लोमा कार्यक्रम के लिए पाठ्यक्रम की रूपरेखा नीचे दी गई है। यह रूपरेखा शिल्प, डिजाईन, सूचना संचार तकनीक, प्रबंधन और उद्यमिता के प्रमुख पहलुओं को समाविष्ट करती है। निम्नलिखित पृष्ठों में कार्यक्रम, सामग्री, कार्यप्रणाली और मूल्यांकन मापदंड आदि के दिशा निर्देश दिए गए हैं, जिनका पालन प्रत्येक पाठ्यक्रम के सेमेस्टर I से VI तक किया जायगा। यू.पी.आई.डी. संकाय, विषय विशेषज्ञों/ विजिटिंग फैकल्टी की सहायता से पाठ्यक्रम सामग्री व्यक्ति/समूह कार्यों और प्रयोगात्मक गतिविधि के बारे में कार्य करेगा।

सेमेस्टर-I

कोर्स 1: डिजाईन का अवलोकन (ओवरव्यू)

सप्ताह - 4
श्रेणी: कौशल (स्किल)

औचित्य:

यह कोर्स डिजाइन के मूल (बेसिक्स) और उसकी भाषा को, सम्पूर्ण रचना के परिपेक्ष्य में समझने के लिए आवश्यक है।

उद्देश्य:

  • छात्रों को डिजाइन के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अवलोकन कराना।
  • डिजाइन अवधारणा की रूपरेखा को समझना।
  • छात्रों को डिजाइन सिद्धांतो से परिचित कराना जैसे ताल, संतुलन, अनुपात, अनुरूपता (हार्मोनी) आदि।
  • छात्रों को विजुअल भाषा की मूल बातें समझने में मदद करना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु:

  • डिजाइन के तत्वों से परिचय।
  • विचार सृजन का परिचय।
  • दृश्य तत्त्वों (विजुअल एलेमेंट्स) की मूल बातों से परिचय।
  • बिंदु (डॉट्स) और रेखा (लाइन्स) की मूल समझ।

कार्यप्रणाली:

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • छोटे असाइनमेंट।
  • समूहिक चर्चा।

कोर्स 2: उद्यमशीलता सिद्धांत और अभ्यास (थ्योरी एवं प्रेक्टिस)

सप्ताह: 5
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य:

इस कोर्स में उद्यमिता के मूल सिद्धांतों तथा विरासत-आधारित और रचनात्मक उद्योग क्षेत्र में श्रेष्ठ तरीकों का परिचय दिया जाएगा।

उद्देश्य :

  • रचनात्मक उद्यम को बड़े उद्योग के संदर्भ में समझना।
  • उद्यमशीलता के सन्दर्भ में शिल्प उत्पाद के उत्पादन और विपणन की समस्याओं और सम्भावनाओं को समझना।
  • उद्यमशीलता और अवसरों के निर्माण के बारे में सीखना।
  • विभिन्न प्रकार के व्यापार मॉडल विकसित करना जो शिल्प की श्रृंखला के लिए उपयुक्त हो।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • उद्यमिता के आधार का परिचय।
  • क्राफ्ट उद्यमिता की बारीकियों की अन्य व्यवसायों से तुलना।
  • भारत में शिल्प उद्यमों का इतिहास।
  • रचनात्मक और विरासत उद्यम में वैश्विक और स्थानीय स्तर की सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी।
  • शिल्प क्षेत्र में सफलता और विफलता के कारकों का विश्लेषण।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और चर्चा।
  • समूहिक प्रस्तुतियां।
  • केस स्टडी और अनुसंधान।
  • असाइनमेंट।

कोर्स 3: परंपरागत भारतीय वस्त्र (ट्रेडिशनल इंडियन टेक्सटाइल्स)

सप्ताह-4
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य :

भारत की समृद्ध शिल्प विरासत का परिचय एवं शिल्प क्षेत्र में चुनौतियां, शिल्प डिजाइन के छात्रों को शिल्प क्षेत्र के दृष्टिकोण से डिजाइन को समझने में मदद करेगा।

उद्देश्य:

  • पारंपरिक भारतीय शिल्प को समझना।
  • भारत की परम्परागत सांस्कृतिक विरासत में रंगों, रूपों, सामग्री, तकनीक की सहायता से विविध क्षेत्रीय शैलियों के विकास को समझना।
  • भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में शिल्प क्षेत्र के योगदान को समझना।
  • उपरोक्त के परिपेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में शिल्प की समझ का विकास।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • परंपरागत भारतीय शिल्प सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास।
  • उत्तर प्रदेश के शिल्प का गहराई से अध्ययन।
  • वस्तु और तकनीक का अध्ययन, जिनका शिल्प क्षेत्र द्वारा उत्तर प्रदेश में आमतौर से प्रयोग होता है।
  • शिल्प अभ्यास/प्रथा और शिल्प उत्पाद में डिजाइन के महत्व को सझना।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान, चर्चा और प्रस्तुतियां।
  • स्वयं अध्ययन।
  • शिल्प केंद्र में बाह्य दौरा।

कोर्स 4: शिल्प उत्पादन एवं मर्चंडाइजिंग

सप्ताह: 5
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य यह होगा कि पारंपरिक और समकालीन शिल्प उत्पादनों में किस प्रकार की प्रक्रिया और तरीको का प्रयोग होता है, उसे सिखाया जाए। इस पाठ्यक्रम में शिल्प के क्रय-विक्रय के विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी दी जाएगी।

उद्देश्य :

  • छात्रों को शिल्प उत्पादन के तकनीकी, प्रबंधकीय और वाणिज्यिक पहलुओं का विश्लेषण करना सीखना जाएगा।
  • नयी डिजाइन के विकास और उत्पाद विविधिकरण से जुड़े मुद्दों की पहचान।
  • गुणवत्ता और मानकों के दृष्टिकोण में विविधता की जानकारी।
  • शिल्प उत्पादों के रचनात्मक क्रय-विक्रय की जानकारी।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • शिल्प शैलियों का अध्ययन, सामग्री और प्रक्रिया के प्रति विभिन्न सांस्कृतिक प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण।
  • शिल्प उत्पादन में प्रयुक्त सामग्रियों, तरीकों और प्रक्रियाओं की जानकारी।
  • क्षेत्रीय शिल्प उत्पादन के विशिष्ट कारक।
  • घरेलू और निर्यात बाजार के लिए वितरण प्रणाली और प्रचार प्रथाएं।
  • क्रय-विक्रय और शिल्प क्षेत्र में इसका सार्थक प्रयोग।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियों।
  • फील्ड विजिट्स और अनुसन्धान।
  • असाइनमेंट।
  • समूहिक चर्चा

कोर्स 5 : प्रबंधन के सिद्धांत

सप्ताह - 2
श्रेणी : थ्योरी

औचित्य :

यह कार्यक्रम छात्रों को प्रबंधन के मूल सिद्धांतों और सफल डिजाइन उद्यम में उनकी प्रासंगिकता से परिचित कराता है।

उद्देश्य :

  • प्रबंधन के मूल सिद्धांतों को समझना।
  • बाजार और व्यापार प्रक्रिया के मूल को समझना।
  • बाजार की वास्तविकताओं को उनके व्यापर के तरीकों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना।
  • शिल्प क्षेत्र में डिजाइन की भूमिका को समझना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • प्रबंधन और विपणन के मूल सिद्धान्त।
  • प्रबंधन के विभिन्न डोमेन/ज्ञान क्षेत्र।
  • एम.एस.एम.ई. (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के सन्दर्भ में प्रबंधन।
  • डिजाइन उद्यमिता के संदर्भ में प्रबंधन।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियों।
  • व्यक्तिगत असाइनमेंट।
  • स्वयं अध्ययन।

कोर्स 6: डिजाइन प्रक्रिया

सप्ताह -2
श्रेणी: स्टूडियो

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम छात्रों को डिजाइन प्रक्रिया की समझ प्रदान करता है। यह अवलोकन अनिवार्य है ताकि प्रतिभागी इन्हें समझ कर इनका उपयोग अपने कार्य क्षेत्र में कर सके।

उद्देश्य :

  • रचनात्मक समस्याएं और उनके समाधान की प्रक्रिया को समझना।
  • डिजाइन प्रक्रिया में चरणों और तरीकों से छात्रों को परिचित कराना, किसी समस्या को समझाना और अनुसन्धान, विश्लेषण और संश्लेषण के माध्यम से उसका समाधान करना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • समस्या को सुलझाने की प्रक्रिया।
  • रचनात्मकता, नवीनता और डिजाइन की प्रणाली।
  • समस्या का विवरण और डिजाइन के मूल तत्व।
  • डिजाइन प्रक्रिया का विश्लेषण एवं मानचित्रण।
  • विभिन्न चरणों में समस्या को हल करने के तरीके और रणनीतियां।
  • डिजाइन सिम्युलेटर और केस स्टडी।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • व्यक्तिगत और सामूहिक असाइंमेंट।
  • प्रायोगिक अन्वेषण।
  • चर्चाएँ/वार्ताएं और प्रतिक्रियाएं।

सेमेस्टर II

कोर्स 7: एमएसएमई का अवलोकन (ओवरव्यू)

सप्ताह – 4
श्रेणी: रिसर्च

औचित्य :

एम.एस.एम.ई. (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के ढांचे और संरचनाओं को समझना और उनकी भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका की जानकारी, साथ ही उद्यमिता प्रशिक्षण में इनकी भूमिका को बारीकी से जानना।

उद्देश्य :

  • छात्रों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमो के वर्गीकरण की जानकारी।
  • ऑपरेशन के पैमाने, अर्थव्यवस्था में योगदान, बाजारों, क्षमताओं और भविष्य के विकास के लिए इन उद्यमों का अवलोकन करना।
  • उनकी विविधताओं के सन्दर्भ में विभिन्न मॉडल्स को समझना और उनका विश्लेषण करना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • व्यवसाय के औपचारिक और अनौपचारिक रूप।
  • राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एम.एस.एम.ई. की भूमिका।
  • व्यापार मॉडल की व्यवहार्यता।
  • एम.एस.एम.ई. मॉडल और शिल्प क्षेत्र।
  • शिल्प उद्यम और उनकी क्षमता।
  • शिल्प क्षेत्र के एम.एस.एम.ई. के लिए बैंकिंग, वित्त, वैधानिक और अन्य पहलुओं की जानकारी।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और चर्चा/ वार्ता।
  • सेल्फ स्टडी।
  • समूहिक प्रस्तुतियां।

कोर्स 8: व्यापार अर्थव्यवस्था

सप्ताह- 1
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम व्यावसायिक अर्थव्यस्था के परंपरागत और आधुनिक पहलुओं के बारे में जानकारी देगा। इससे स्थानीय और वैश्विक परिपेक्ष्य में व्यापार के मूल सिद्धांत को समझने में मदद मिलेगी।

उद्देश्य :

  • आर्थिक मूल्य सृजन के दृष्टिकोण से समाज-उद्योग-बाजार-उद्यम के संगठन को समझना।
  • अर्थशास्त्र के मूल सिद्धांतों और व्यापक अवधारणाओं की जानकारी सीखना।
  • आधुनिक विश्व में शिल्प और संस्कृति के साथ संभावित आर्थिक अवसरों को समझना

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • अर्थशास्त्र के मूल सिद्धांत।
  • वैश्वीकरण के संदर्भ में शिल्प।
  • माइक्रो इकोनॉमिक्स के सिद्धांत।
  • वृहत और सूक्ष्म अर्थशास्त्र के सन्दर्भ में शिल्प और शिल्प समूहों को समझना।
  • रचनात्मक उद्यम के विकास और प्रबंधन के आर्थिक दृष्टिकोण को समझना।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान।
  • बाह्य दौरा।
  • सेल्फ स्टडी और अनुसन्धान।
  • व्यक्तिगत और समूहिक असाइनमेंट।

कोर्स 9: मानव संसाधन प्रबंधन

सप्ताह- 2
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम छात्रों को मानव संसाधन प्रबंधन के बुनियादी सिद्धांतों और डिजाइन उद्यमशीलता की सफलता में उनकी भूमिका को समझने में मदद करता है।

उद्देश्य :

  • मानव संसाधन प्रबंधन की मूल बातों को समझना।
  • रचनात्मक मानव संसाधन के विचारों और प्रथाओं/अभ्यासों को समझना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • मानव संसाधन प्रबंधन के सिद्धांत।
  • संगठनात्मक व्यवहार।
  • मूल्य (वैल्यू) श्रृंखला का निर्माण और प्रबंधन।
  • रचनात्मक संगठनों के लिए समकालीन मानव संसाधन प्रथाएं।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • केस स्टडी।
  • सेल्प स्टडी।
  • व्यक्तिगत और सामूहिक असाइनमेंट।

कोर्स 10: वित्त एवं लेखा

सप्ताह – 3
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम छात्रों को आर्थिक योजना और लेखा के मूल ज्ञान को कंप्यूटर की सहायता से जानने में मदद करता है।

उद्देश्य :

  • विभिन्न वित्तीय मॉडल और योजनाओं की तकनीकों को समझना।
  • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सहायता से मूल लेखा प्रणाली को समझना।
  • शिल्प उत्पादों और सेवाओं की लागत और कीमत का आकलन करना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • वित्तीय प्रबंधन का परिचय।
  • लेखा और बहीखाता की मूल बातें।
  • वित्तीय योजना और रणनीति।
  • शिल्प उत्पादों की लागत और कीमत।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • केस स्टडी।
  • सेल्फ स्टडी।
  • व्यक्तिगत और सामूहिक असाइनमेंट।

कोर्स 11: विपणन के मूल सिद्धांत

सप्ताह -2
श्रेणी – थ्योरी

औचित्य:

इस विषय का उद्देश्य है विपणन के मूल सिद्धांतों, उनकी भूमिका और आधुनिक विश्व में उनकी उपयोगिता की जानकारी देना है।

उद्देश्य :

  • विपणन के सिद्धांतों को समझना।
  • विपणन के विभिन्न सहायक कार्यों को समझना।
  • यह समझना कि कैसे विपणन को एक ऐसे कारक के रूप में प्रयोग किया जाए जिससे शिल्प को विभिन्न दृष्टिकोण से पेश किया जा सके।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु

  • विपणन प्रबंधन का परिचय।
  • लक्षित उपभोक्ताओं को वर्गीकृत करना और उसके अनुसार उत्पादों को पेश करना।
  • उपभोक्ता के व्यवहार को समझना।
  • शिल्प उत्पादों के विपणन में सफल अभ्यास।
  • समकालीन अभ्यास और नया मीडिया विपणन।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • व्यक्तिगत असाइनमेंट।
  • सेल्फ स्टडी।

कोर्स 12: प्रोजेक्ट-1: शिल्प उद्यम प्रलेखन

सप्ताह- 9
श्रेणी: प्रोजेक्ट

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम छात्रों के लिए व्यक्तिगत स्तर पर शिल्प क्षेत्र के अनुभव करने के लिए, उसकी क्षमता और कमजोरियों को समझने के लिए और पूर्व-निर्धारित संदर्भ में उसकी भूमिका की समझ विकसित करने के लिए आवश्यक है।

उद्देश्य :

  • उत्तर प्रदेश की समृद्ध शिल्प विरासत में पारंपरिक उद्यमिता को समझना।
  • शिल्प उद्योग में उद्यमिता की भूमिका और उसकी निरंतरता से जुड़ी गतिविधियों को समझना।
  • सांस्कृतिक ज्ञान प्रणालियों को समझना और उनको आधुनिक दृष्टिकोण में कैसे अपनाया जा सकता है।
  • उत्तर प्रदेश में शिल्प और शिल्प समुदायों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना तथा उनसे संपर्क स्थापित करना

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • किसी एक विशेष शिल्प और शिल्प समुदाय के बारे में गहराइ से अध्ययन और प्रलेखन करना, विशेषतः शिल्प के विकास, परंपरागत डिजाअन और उत्पाद के तरीकों, सामग्री का प्रयोग, बाजार से सम्बन्ध, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिशीलता के संदर्भ में।
  • लिखित और दृश्य आकड़े (डाटा) इकट्ठा करना।
  • शिल्प समुदायों के साथ घनिष्ठ संपर्क बनाना।
  • व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि (इनसाइट) की प्रस्तुति।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • बाह्य दौरा।
  • अनुसन्धान।
  • प्रलेखन।

सेमेस्टर III

कोर्स 13: समाज और संस्कृति का अध्ययन

सप्ताह- 1
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम छात्रों को संस्कृति और सामाजिक संरचना पर विकासवादी दृष्टिकोण से विचार करने में सक्षम बनाता है।

उद्देश्य :

  • वातावरण को समझना और उसका सामाजिक ढांचों और उनकी सांस्कृतिक अभिरुचियों के सन्दर्भ में व्यक्ति पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी प्राप्त करना।
  • अभिव्यक्ति और संचार के साधनो को समझना और भारतीय संदर्भ में भौतिक संस्कृति का विकास।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • भारतीय समाज और संस्कृति के ऐतिहासिक और आधुनिक सन्दर्भ।
  • भौतिक संस्कृति: मानव और पर्यावरण के बीच का ताल-मेल।
  • सामाजिक संरचनाएं और सांस्कृतिक पहचान का विकास।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • समूहिक चर्चा।
  • संग्रहालय दौरा।
  • सेल्फ स्टडी।

कोर्स 14: डिजिटल मीडिया और आई.सी.टी.

सप्ताह - 3
श्रेणी: स्टूडियो

औचित्य :

पेशेवर लोगों के लिए नई तकनीकी और संचार कौशल की अच्छी समझ जरूरी है।

उद्देश्य :

  • छात्रों को सम्बंधित सॉफ्टवेयर कौशल और इन्टरनेट संचार से परिचित कराया जाए, जो कि आधुनिक व्यापार के लिए आवश्यक है।
  • शिल्प व्यवसाय के विपणन में डिजिटल मीडिया की भूमिका के प्रति छात्रों को संवेदनशील बनाया जाए।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • मूल कंप्यूटर कौशल का प्रयोग।
  • वर्ड प्रोसेसिंग, लेखा और प्रस्तुति के लिए सॉफ्टवेयर।
  • छायाचित्र (फोटो) के विकास और प्रोसेसिंग के लिए सॉफ्टवेयर।
  • इन्टरनेट संचार उपकरण।

कार्यप्रणाली :

  • प्रदर्शन और प्रस्तुतियां।
  • अभ्यास असाइन्मेंट।
  • सेल्फ स्टडी।
  • समूहिक प्रोजेक्ट्स।

कोर्स 15: डिजाइन और उन्नयन

सप्ताह -3
श्रेणी: स्टूडियो

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम छात्रों के लिए जरूरी है क्योंकि ज्ञान-आधारित अर्थ व्यवस्था में आधुनिक उद्यमों के लिए डिजाइन और नवीनीकरण ही सबसे जरूरी है।

उद्देश्य :

  • उत्पाद वैविद्ध्य से छात्रों को परिचित कराना।
  • छात्रों को डिजाइन प्रथाओं/अभ्यास और नये तरीकों के बारे में बताया जायेगा।
  • यह समझना कि डिजाइन और नवीनता किस प्रक्रार शिल्प व्यापार मॉडल और प्रक्रियाओं के प्रयोग में सहायता कर सकता है।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • डिजाइन के तरीकों और मूल्य वर्धन के लिए रणनीतियां।
  • नये उपकरण और तकनीक।
  • विभेदीकरण के लिए खोज और प्रयोग।
  • व्यापार डिजाइन में नवीनता।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रदर्शन।
  • 2डी और 3डी मॉडल बनाने का कार्य।
  • समूहिक चर्चा।

कोर्स 16: व्यापर संचार (बिज़नेस कम्युनिकेशन)

सप्ताह - 2
श्रेणी: कौशल

औचित्य:

संचार ही आधुनिक उद्यम का सार है। प्रबंधन के मूल कार्यों को भी प्रभावी संचार के बिना नहीं किया जा सकता।

उद्देश्य :

  • छात्रों को कौशल और प्रासंगिक संचार के तरीको के साथ प्रशिक्षित करना।
  • छात्रों को अच्छी जानकारी की संरचना और प्रस्तुतियों के बारे में अवगत कराना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • व्यापार संचार का परिचय।
  • सूचना प्रवाह और प्रतिक्रिया तंत्र।
  • लिखित, मौखिक और गैर मौखिक संचार।
  • उद्यमों के भीतर संचार।
  • बाहरी एजेंसीज के साथ संचार।
  • उत्पाद विकास और गुणवत्ता मानकों के लिए संचार।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • अभ्यास असाइन्मेंट।
  • सेल्फ स्टडी।
  • समूहिक प्रोजेक्ट।

कोर्स 17: प्रोजेक्ट-II: स्थानीय बाजार के लिए शिल्प उद्योग

सप्ताह -10
श्रेणी : प्रोजेक्ट्स

औचित्य :

यह परियोजना छात्रों द्वारा अर्जित किये गए कौशल के उपयोग करने की क्षमता का परीक्षण करता है। यह अन्य कार्यक्रमों के प्रतिभागियों को एक साथ लाने में मदद करता है और उनके ज्ञान का उपयोग करने में मदद करता है।

उद्देश्य :

  • अर्जित किये गए ज्ञान को उपयोग करने वाले लोगों की जरुरत के हिसाब से इस्तेमाल करना और निर्धारित स्थानीय बाजार के सन्दर्भ में शिल्प व्यापर की योजना बनाना।
  • बाजार अनुसन्धान के आकड़ों का उपयोग करना और उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को समझना।
  • रचनात्मक विचारों को विकसित करना, जो शिल्प क्षेत्र के लिए उपयुक्त हों।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • उपभोक्ता की वरीयता, उपयुक्त विकल्प की उपलब्धता, सामग्री और प्रक्रिया, उत्पादन की लागत और विपणन मॉडलस के अनुसार आकड़ें इकट्ठा करना और उसका विश्लेषण करना।
  • बाजार में उपलब्ध विकल्पों का अध्ययन।
  • अवसर क्षेत्र को परिभाषित करना।
  • वैकल्पिक अवधारणाओं को विकसित करना और कार्यात्मक उपयोगिता से व्यापार योजनाओं की मान्यता अर्जित करना।
  • वैकल्पिक अवधारणाओं का मूल्यांकन।
  • एक अवधारणा को अंतिम रूप देना और व्यवहार्यता रिपोर्ट का विकास।

कार्यप्रणाली :

  • डाटा का संग्रहण और विश्लेषण।
  • प्रस्तुतियां और समूहिक चर्चा।
  • व्यवहार्यता रिपोर्ट का विकास।
  • लगातार प्रतिक्रिया एकत्र करना।

सेमेस्टर IV

कोर्स 18: सिस्टम डिजाइन

सप्ताह-2
श्रेणी: स्टूडियो

औचित्य :

यह पाठ्यक्रम छात्रों को परिस्थिति का व्यापक संज्ञान लेने के लिए तैयार करता है, जिससे वे स्थितियों के पारस्परिक सम्बन्ध को समझ सकें। यह उनकी योजनाओं और प्रस्तावों की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करेगा।

उद्देश्य :

  • छात्रों को प्रणाली के सिद्धांत से परिचित कराना।
  • छात्रों को पैटर्न, अंतर-संबंधों और वास्तविक जगत की प्रणालियों से परिचित कराना।
  • उपकरणों के साथ प्रणाली का अध्यन करना और उनकी आपसी निर्भरता को समझना।
  • डिजाइन समस्याओं को सुलझाने के लिए तकनीक को सीखना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • प्रणाली-सम्बंधित विचारों को समझना।
  • प्रणाली के संगठन और उसके घटकों का परिचय।
  • नई प्रणाली की डिजाइनिंग या उसके घटक।
  • प्रणाली का इष्टतम उपयोग।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • प्रैक्टिकल असाइनमेंट।
  • प्रतिक्रिया और चर्चा।

कोर्स 19: पैकेजिंग और ब्रांडिंग

सप्ताह -2
श्रेणी: स्टूडियो

औचित्य :

शिल्प के सफलतापूर्वक व्यापार के लिए पैकेजिंग और ब्रांडिंग का अध्ययन।

उद्देश्य :

  • छात्रों को पैकेजिंग और ब्रांडिंग को विपणन के महत्वपूर्ण साधन के रूप में परिचित कराना।
  • छात्रों को उत्पाद की प्रस्तुति की कला से परिचित कराना, साथ ही एक आकर्षक पैकेजिंग और उत्पाद के लिए आकर्षक ब्रांड बनाने के बारे में बताना।
  • एक उत्पाद को प्रस्तुत करने के विभिन्न पहलुओं पर छात्रों को शिक्षित करना, जैसे -– पैकेजिंग की आकृति, आकार, प्रस्तुति, रंग और डिजाइन।
  • छात्रों को सही मीडिया चुनने की लिए शिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वह ग्राहकों को सही सन्देश दे सकें।
  • छात्रों को पैकेजिंग की प्रभावशीलता के बारे में प्राशिक्षित करना, अर्थात जाँच करके यह देखना कि कितने लोगों वह विज्ञापन और सन्देश याद है।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • पैकेजिंग और ब्रांडिंग की अवधारणाएं।
  • विज्ञापन और विपणन की रणनीतियां।
  • पैकेजिंग डिजाइन। शिल्प के उत्पाद के लिए पैकेजिंग समाधान।
  • विजुअल मर्चंडाइजिंग।
  • ब्रांड रणनीति का मूल्यांकन।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान/प्रस्तुतियां।
  • समूहिक चर्चा।
  • व्यक्तिगत और समूहिक असाइन्मेंट।

कोर्स 20: रुझान का अध्ययन (ट्रेंड स्टडी)

सप्ताह –2
श्रेणी: अनुसन्धान

औचित्य:

बाजार के रुझान का अनुसन्धान और ग्राहकों के झुकाव को जानने की क्षमता डिजाइन उद्यमिता के लिए जरूरी है।

उद्देश्य :

  • छात्रों को परिचित कराना कि पूर्वानुमान की अवधारणा व्यापार की योजना और रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • छात्रों को सामाजिक, आर्थिक प्रवृत्तियों के महत्व, सांस्कृतिक विकास, तकनीकी विकास, उपभोक्ताओं की वरीयता और अन्य कारण जो व्यापारिक वातावरण को बनाते हैं आदि को समझाना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • बाजार और उपभोक्ता अनुसंधान क्षेत्र के सिद्धांत।
  • उपभोक्ता के निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझना।
  • थीम और अवधारणाएं जिनसे मांग और आकांक्षाओ पर प्रभाव पड़ता है।
  • रुझान, पूर्वानुमान और बाजार के नेतृत्व की रणनीतियां।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और चर्चा।
  • अनुसन्धान असाइन्मेंट।
  • प्रतिक्रिया और चर्चा।

कोर्स 21: फैमली बिज़नेस डायनमिक्स

सप्ताह-1
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य :

पारिवारिक व्यवसाय की गतिविधियों को समझना जरुरी है क्योंकि शिल्प व्यवसाय का बड़ा हिस्सा इस संरचना के अंतर्गत विकसित हुआ है और इस प्रणाली के कुछ फायदे और नुकसान भी हैं।

उद्देश्य :

  • परंपरागत पारिवारिक व्यापार के घटकों को समझना।
  • काम की रणनीति और संगठन की भूमिका को समझना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • भारत में परंपरागत पारिवारिक व्यवसाय का इतिहास, शिल्प के विशेष सन्दर्भ में।
  • संरचना और परिवार उद्यम का संगठन।
  • फैमली डायनमिक्स: क्षमता और अवसर।
  • परिस्थितियों के मानचित्रण द्वारा विश्लेषण और समाधान।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • रिसर्च असाइन्मेंटस।

कोर्स 22: बौद्धिक सम्पदा के अधिकार

सप्ताह -2
श्रेणी: थ्योरी

औचित्य :

वैश्वीकरण के साथ सांस्कृतिक उद्योगों के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। शिल्प उद्यमियों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि वे शिल्पकारों के हित में आई.पी. का प्रयोग कैसे करें।

उद्देश्य :

  • शिल्प में बौद्धिक सम्पदा के घटकों को समझना।
  • व्यापार लाभ और सुरक्षा के लिए रणनीतियां सिखाना।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • समुदाय और सांस्कृतिक विचारों के संदर्भ में बौद्धिक संपदा के तत्व।
  • डिजाइन पंजीकरण के लिए आई.पी. भरने की प्रक्रिया।

कार्यप्रणाली :

  • व्याख्यान और प्रस्तुतियां।
  • रिसर्च असाइन्मेंट।

कोर्स 23: प्रोजेक्ट III: निर्यात बाजार के लिए शिल्प व्यसाय

सप्ताह -10
श्रेणी: प्रोजेक्ट

औचित्य :

यह प्रोजेक्ट छात्रों के अर्जित किये गए कौशल को लागू करने की क्षमता का परीक्षण करता है। इससे विभिन्न पाठ्यक्रमो से प्राप्त हुए ज्ञान को वास्तविक जीवन में इस्तमाल करने में मदद मिलेगी।

उद्देश्य :

  • अर्जित ज्ञान को उपभोक्ता की आवश्यकता को समझना एवं ऐसे शिल्प व्यापार की रणनीति बनाना जो निर्यात बाजार के लिए जरूरी हो।
  • बाजार अनुसन्धान के आकड़ों को प्रयोग करने की क्षमता को विकसित करना और उपभोक्ता की जरूरतों को समझना।
  • रचनात्मक व्यापार के विचारों एवं अवधारणाओं को विकसित करना, जो शिल्प क्षेत्र के लिए उपयुक्त हो।

पाठ्यक्रम विषयवस्तु :

  • उपभोक्ता की वरीयताओं के अनुसार उपयुक्त विकल्प की उपलब्धता, सामग्री और प्रक्रिया, उत्पादन की लागत और विपणन का मॉडल सम्बंधित आकड़ों को संग्रहित और उनका विश्लेषण करना।
  • बाजार में उपलब्ध विकल्पों का अध्ययन।
  • अवसर क्षेत्र की परिभाषा।
  • विकल्पिक अवधारणाओं को विकसित करना तथा व्यवहार्यता और कार्यात्मक उपयोगिता के दृष्टिकोण से व्यापारिक योजनाओं का सत्यापन करना।
  • वैकल्पिक अवधारणाओं का मूल्यांकन।
  • एक अवधारणा का अंतिम रूप और विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट को विकसित करना।

कार्यप्रणाली :

  • डाटा को इकठ्ठा करना और उसका विश्लेषण करना।
  • प्रस्तुतियों और समूहिक चर्चा।
  • व्यवहार्यता रिपोर्ट बनाना।
  • लगातार प्रतिक्रिया प्राप्त करना।