मिशन एवं विजन

अनुसंधान से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन की व्यापक स्थापना राज्य के शिल्प के क्षेत्र में डिजाइन के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभा सकती है। इस के साथ यह अपनी संस्थान सरंचना एवं भौगोलिक स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उसके पड़ोसी राज्यों में भी शिल्प के क्षेत्र की जरूरतों को पूरा कर पाने में सक्षम होगा। भारत के उत्तरी, मध्य और पूर्वी भागों में, शिल्प कला से समृद्ध होने के बावजूद इस प्रकार की कोई संस्था मौजूद नहीं है | ऐसे में यू. पी.आई.डी. की स्थापना एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

संस्थान की पुनःस्थापना कई तत्वों द्वारा नियंत्रित होगी जिससे यह संस्थान भविष्य में यह एक सार्थक भूमिका निभा पाए। वह तत्व इस प्रकार हैं; यू. पी. आई. डी का इतिहास , शिल्प डिजाइन का वर्तमान परिदृश्य, राज्य में शिक्षा , शिल्प के क्षेत्र में नीतियां एवं प्राथमिकताएँ, उपयोगकर्ता के रुझान और शिल्प के बाजार की क्षमता, अर्थव्यवस्था और शिक्षा के बीच आपसी संबंध तथा उपलब्ध संसाधन।

उपरोक्त तत्वों को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्तावित किया गया है कि यू. पी. आई. डी की तीन मुख्य गतिविधियां होंगी जो हैं; नवोन्मेष, प्रसार एवं प्रोत्साहन, इसके अलावा शिल्प के क्षेत्र में प्रशिक्षण और शिक्षा भी प्रदान की जाएगी।

उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन

नवोन्मेष | प्रसार | प्रोत्साहन

संस्थान मिश्रित क्षमताओं का एक ऐसा शिक्षणशास्र प्रदान करेगा जिसमें कौशल, संबन्धित जानकारी, मूल्यों और वैश्विक नज़रिये का अच्छा संयोजन होगा। इसलिए यू. पी. आई. डी के स्नातकों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके पास डिजाइन से संबंधित समस्याओं को सुलझाने की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण हो। इस सन्दर्भ में संस्थान के स्नातकों के अपेक्षित लक्षण इस प्रकार हैं; समाधानों को डिज़ाइन करने में ज्ञप्ति, विचारों को व्यक्त करने की क्षमता, डिजाइन प्रबंधन कौशल, सहयोगात्मक रवैया, तकनीकी ज्ञान तथा डिजाइन की सोच। इसके साथ-साथ स्नातकों से यह भी अपेक्षित किया जाता है कि वह संदर्भ को समझने की क्षमता रखते हों तथा स्थानीय मुद्दों का विश्लेषण करके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए योगदान कर पाएं। इसलिए यू. पी. आई. डी की यह परिकल्पना है कि वह उत्तर प्रदेश में शिल्प के विकास के लिए पेशेवरों का निर्माण करे जो डिजाइन हस्तक्षेप और उद्यमिता प्रशिक्षण के माध्यम से नए जमाने के रचनात्मक उद्योगों की स्थापना करने में सक्षम हों।

इस प्रकार संस्थान का प्रमुख कार्य शिक्षा, प्रशिक्षण, डिजाइन सेवा, अनुसंधान और प्रलेखन, प्रकाशन ऊष्मायन तथा जागरूकता प्रदान करना होगा। इन सभी पहलों के व्यापक उद्देश्य इस प्रकार हैं :

  • शिल्प के समकालीन अभ्यास के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भ की पहचान करना
  • डिजाइन और उद्यमशीलता प्रशिक्षण का उपयोग करके शिल्प के विकास एवं विविधीकरण का समर्थन करना
  • शिल्प उत्पादों की प्रतिस्पर्धा और बाजार की स्वीकृति की वृद्धि के लिए विभिन्न क्षेत्रों में डिजाइन अनुसंधान का संचालन करना
  • ऊष्मायन प्रक्रियाओं के माध्यम से शिल्प के क्षेत्र में स्थायी डिजाइन प्रथाओं के विकास में योगदान करना
  • युवाओं और व्यापक दर्शकों के बीच डिजाइन एवं शिल्प की सराहना को बढ़ावा देना

अद्वितीय डिजाइन शब्दावली और विविध कौशल के साथ शिल्प, राज्य में नए युग की रचनात्मक उद्योगों की स्थापना में संसाधन हो सकता है। परन्तु इसे पेशेवर गुणवत्ता के डिजाइन शिक्षा और उद्यमिता प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसलिए यू. पी. आई. डी का नया ढांचा निर्धारित किया गया है जिसके अंतर्गत संस्थान की सभी गतिविधियों को तीन व्यापक उद्देशों में श्रेणीबद्ध किया गया है जो इस प्रकार हैं :

नवोन्मेष

आज के समय में नवोन्मेष ही जनता एवं बाजार को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सक्षम है। अतः यह यू. पी. आई. डी के पाठ्यक्रम और शिक्षा शास्त्र का एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण होगा। नवोन्मेष योजनाबद्ध तरीके से शिल्प अभ्यास की सामग्री, तरीकों, उत्पाद, प्रक्रियाओं, उपकरण के सभी पहलुओं और प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित किये जाएंगे। डिज़ाइन एवं डिज़ाइन सोच ही विभिन्न प्रयोगों तथा रचनात्मक खोजों के लिए मार्गदर्शी शक्ति स्रोत है। जबकि संस्थान में शिक्षा कार्यक्रम नवोन्मेष के लिए रवैया पैदा करेगा तथा एक विकास स्टूडियो नए विचारों पर आधारित नमूने और प्रोटोटाइप को विकसित करने में मदद करेगा। इसके अलावा परिसर में स्टूडियो के साथ एकीकृत परिसर में एक इनक्यूबेटर भी स्थापित होगा जो अभिनव विकास कार्यों को गति देगा और उन्हें व्यवहार्य व्यापार योजनाओं में परिवर्तित करेगा। इसके साथ-साथ ऊष्मानियंत्रक शिल्पकार-डिजाइनर-उद्यमी सहयोगों को शिल्प के क्षेत्र में नए संघों की शुरुआत करने में सुविधाएँ प्रदान करेंगे।

प्रसार

विचारों, ज्ञान, कौशल और शिल्प के क्षेत्र में नए विकास कार्यों का प्रसार करना ही यू. पी. आई. डी का मुख्य कार्य है। संस्थान में अनुसंधान और विकास के माध्यम से समझ को उभारने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम उचित रूप से अनुकूलित किये जायेंगे जो शिक्षार्थियों की अलग-अलग रूपरेखा के पूरक होंगे। इस प्रकार यहाँ सर्टिफिकेट कार्यक्रमों के तहत अल्पकालिक वर्कशॉप आयोजित होंगी जो कौशल विकास और क्षमता वृद्धि पर सतत शिक्षा के प्रारूप में केंद्रित होंगी। क्राफ्ट डिजाइन और शिल्प उद्यमिता के क्षेत्र में दो डिप्लोमा कार्यक्रम क्षेत्र के लिए युवा पेशेवरों के प्रशिक्षण पर ध्यान देंगे। इसके साथ आउटरीच कार्यक्रम डिजाइन परियोजनाओं को शुरू करने और रणनीतिक हस्तक्षेपों के साथ कार्यशालाओं के प्रशिक्षण पर ध्यान देंगे। आउटरीच विभाग सक्रिय रूप से क्षेत्र में काम करेगा तथा यह कारीगरों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा। इसके अलावा यू. पी. आई. डी उद्योग के लिए विशेषज्ञों की सलाह के माध्यम से परिपक्व आदानों का विस्तार करने के लिए शिल्प समूहों में डिजाइन क्लीनिक का आयोजन करेगा।

प्रोत्साहन

उत्तर प्रदेश की शिल्पकला, परंपराओं, समुदायों, लोगों , प्रथाओं, और उत्पादों का प्रोत्साहन करना संस्थान की कार्यसूची का एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु होगा। अपने साधनों एवं प्रक्रियाओं द्वारा, संस्थान जनमानस में शिल्प के प्रति जागरूकता बनाए रखेगा। इसके साथ परिसर में अच्छी तरह से डिजाइन किया गया संग्रहालय होगा जो नियमित रूप से शिल्प के क्षेत्र में आकर्षक प्रकाशनों के माध्यम से इस दिशा में बहुत योगदान देगा। यह संस्थान कक्षाओं के डिजाइन और विकास परियोजनाओं को वह प्लेटफ़ार्म प्रदान करेगा जहां छात्र तथा प्रशिक्षक समस्या को सुलझाने पर एक साथ काम कर सकेंगे। यह दृष्टिकोण व्यापक स्तर पर कारीगरों, निर्यातकों, खुदरा विक्रेताओं और समाज के साथ प्रभावी संबंधों के निर्माण में मदद करेगा। इसके साथ-साथ यू. पी. आई. डी नियमित रूप से कारीगरों और संस्थान में विकसित अच्छी तरह से डिजाइन उत्पादों से चयनित शिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी-सह-बिक्री की सुविधा प्राप्त कराएगा। यह प्रदर्शनियों संचार, बाजार के परीक्षण और विचारों की प्रतिक्रिया जो जांचने का एक माध्यम बन जाएंगी। शिल्प को सांस्कृतिक विरासत, बाज़ार तथा आधुनिक जीवन शैली के साथ प्रासंगिक विषय-वस्तु के तौर पर प्रसारित करना ही संस्था का एकमेव उद्देश्य होगा। प्रचार सामग्री और घटनाओं के डिजाइन पर कार्य भी पाठ्यक्रम का एक हिस्सा हो सकता है। संस्थान शिल्प में अवसरों का विस्तार करने के लिए पर्यटन और अन्य उद्योग के साथ सहयोग कर सकता है।